बिलासपुर की गौशाला में 20 से अधिक मवेशियों की मौत से आक्रोश, ग्रामीणों ने की कलेक्टर से जांच की मांग
बिलासपुर: शासन की ओर से गौवंश संरक्षण और गौशालाओं की बेहतर व्यवस्था के दावों के बीच बिलासपुर जिले की पचपेड़ी तहसील के ग्राम पंचायत ओखर से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां स्थित 'गौ धाम वासुदेव सेवा समिति' गौशाला में पर्याप्त चारा, पानी और इलाज न मिलने के कारण 20 से अधिक गौवंश की मौत होने का दावा किया जा रहा है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में लंबे समय से भूख, प्यास और बदहाली का आलम था। यदि समय रहते मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा-पानी और चिकित्सा उपचार का प्रबंध किया जाता, तो इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की मौतों को टाला जा सकता था। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में गौशाला परिसर में कीचड़ के बीच मृत मवेशी पड़े दिखाई दे रहे हैं, वहीं जीवित मवेशी भी अत्यंत दयनीय हालत में भूख-प्यास से तड़पते नज़र आ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर गौशाला की देखरेख की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों पर बताई जा रही है। ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की तत्काल उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- पारदर्शी जांच: गौशाला में मौजूद गौवंश की वास्तविक संख्या, मृत मवेशियों का आंकड़ा और उन्हें उपलब्ध कराए गए चारा-पानी व चिकित्सा सेवा की निष्पक्ष जांच हो।
- वित्तीय ऑडिट: गौशाला और गौ संरक्षण के नाम पर शासकीय मद से जारी की गई राशि के खर्च का पूरा हिसाब उजागर किया जाए।
- कड़ी कार्रवाई: जिम्मेदार समिति पदाधिकारियों, संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, सचिव तथा लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
यद्यपि मौतों के वास्तविक कारणों और प्रशासनिक जिम्मेदारी का पूरा खुलासा जांच रिपोर्ट के बाद ही संभव हो सकेगा, लेकिन इस घटना ने गौ संरक्षण के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
