हिंदू संस्कृति के संरक्षण और नशा मुक्ति का अलख जगा रहे 26 वर्षीय भोला विश्वकर्मा, 40 दिनों में 10 जिलों की पदयात्रा पूरी

हिंदू संस्कृति के संरक्षण और नशा मुक्ति का अलख जगा रहे 26 वर्षीय भोला विश्वकर्मा, 40 दिनों में 10 जिलों की पदयात्रा पूरी

मस्तूरी। ग्राम पंचायत हरदी  (टेका) के निवासी जिला राजनांद गांव 26 वर्षीय युवा भोला विश्वकर्मा, पिता श्री दशरथ विश्वकर्मा* समाज में सकारात्मक बदलाव और सांस्कृतिक चेतना जगाने के लिए अनोखी पहल कर रहे हैं। वे पिछले 40 दिनों से घर से दूर छत्तीसगढ़ भ्रमण पदयात्रा पर हैं और पैदल चलकर जन-जागरूकता का अलख जगा रहे हैं।

यात्रा के दो मुख्य ध्येय

भोला विश्वकर्मा ने बताया कि उनकी इस पदयात्रा के दो मुख्य उद्देश्य हैं -

1. हिंदू धर्म एवं संस्कृति का संरक्षण:* समाज में सनातन संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को बरकरार रखना तथा लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना।

2. नशा मुक्ति अभियान:* युवाओं और छोटे-बड़े बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें नशा मुक्त स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना।


अब तक 10 जिलों का सफर पूरा*

अपने दृढ़ संकल्प के साथ भोला अब तक प्रदेश के *10 जिलों* - *बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, बलौदाबाजार और बिलासपुर* में पदयात्रा कर चुके हैं। यात्रा के दौरान वे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लोगों से संवाद कर धर्म-संस्कृति की रक्षा और नशा मुक्ति का संदेश दे रहे हैं।


भोला एक सामान्य और संस्कारी परिवार से आते हैं। उनके परिवार में कुल 6 सदस्य हैं - माता-पिता, एक भाई और तीन बहनें। स्थानीय निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उनकी इस निस्वार्थ सामाजिक पहल की सराहना की जा रही है।


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