कृषि विभाग में प्रशासनिक लचर व्यवस्था का आरोप, पदोन्नतियां अटकीं
अपर संचालक के 8, संयुक्त संचालक के 4 और उप संचालक के 6 पद खाली; 280 से अधिक SADO पद भी रिक्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभाग में शीर्ष स्तर से लेकर मैदानी स्तर तक बड़ी संख्या में पद रिक्त होने और लंबे समय से पदोन्नति आदेश जारी नहीं होने का आरोप लगाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अपर संचालक के 8, संयुक्त संचालक के 4 और उप संचालक के 6 पद खाली हैं।
बताया गया है कि इन पदों पर नियमित पदस्थापना नहीं होने के कारण कई जिला कृषि अधिकारी, विकासखंड कार्यालय और प्रयोगशालाएं अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रही हैं। इससे विभागीय कामकाज और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की बात कही गई है।
करोड़ों खर्च के बाद प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की कमी
राज्य में उर्वरक, बीज और कीटनाशक के परीक्षण के लिए 8 अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। इन प्रयोगशालाओं में करोड़ों रुपये खर्च कर भवन और मशीनरी उपलब्ध कराई गई, लेकिन विश्लेषकों (Analysts) की कमी के कारण प्रयोगशालाओं का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पा रहा है। आरोप है कि नमूनों की समय पर जांच नहीं होने से अमानक खाद, बीज और कीटनाशकों पर प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हो रही है।
इसका सीधा असर किसानों और कृषि व्यवस्था पर पड़ने की बात कही गई है। कृषि आदानों की गुणवत्ता की जांच में देरी होने से बाजार में अमानक सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने का आरोप है।
280 से अधिक SADO पद रिक्त
मैदानी स्तर पर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) के 280 से अधिक पद रिक्त बताए गए हैं। पदोन्नति की पात्रता रखने वाले अधिकारियों द्वारा लंबे समय से अपने अधिकार के लिए इंतजार किए जाने की बात कही गई है।
कई जिलों में जिला कृषि अधिकारी अतिरिक्त प्रभार में
जानकारी के अनुसार प्रदेश के आधे दर्जन से अधिक जिलों में जिला कृषि अधिकारी (DDA) का पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रहा है। इसके अलावा कई जिला कार्यालय, विकासखंड कार्यालय और प्रयोगशालाओं का काम भी अतिरिक्त प्रभार से चलने का दावा किया गया है।
विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष की स्थिति बनने की बात सामने आई है। उठ रहे सवालों के बीच विभागीय स्तर पर रिक्त पदों को भरने और लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है।
