एरमशाही समिति में एक के बाद एक गड़बड़ी के आरोप, 164 क्विंटल धान के बाद अब 280 बोरी यूरिया खाद के गबन का मामला
मस्तूरी। मस्तूरी क्षेत्र की सेवा सहकारी समिति एरमशाही एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। समिति प्रबंधन पर 164 क्विंटल धान के परिवहन में कथित अनियमितता के साथ-साथ 280 बोरी यूरिया खाद के गबन का आरोप लगाया गया है। मामले में संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 11 अप्रैल 2026 को सामने आए एक मामले में आरोप लगाया गया था कि एरमशाही सेवा सहकारी समिति में 164 क्विंटल धान का परिवहन केवल कागजों पर दर्शाकर शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इस मामले को लेकर शिवसेना और भारतीय कामगार सेना द्वारा वीडियो साक्ष्य के साथ कलेक्टर एवं एसएसपी बिलासपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई थी। शिकायत में समिति प्रबंधक, राइस मिल संचालक सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने और तत्काल निलंबन की मांग की गई थी।
वहीं, अब 280 बोरी यूरिया खाद के कथित गबन का मामला भी सामने आने से समिति प्रबंधन पर सवाल और गहरा गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2023-24 में भी करीब 70 लाख रुपये के धान की हेराफेरी/गबन का मामला सामने आया था। इसके बावजूद यदि दोबारा इतनी बड़ी मात्रा में धान और खाद को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि समिति में पहले भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, तो उसके बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई और निगरानी की गई? 164 क्विंटल धान और 280 बोरी यूरिया खाद से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पूरे मामले की दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों के आधार पर जांच कराई जाए तथा यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किसानों के लिए आवंटित खाद और धान के स्टॉक का हिसाब-किताब कहां और किस स्तर पर गड़बड़ हुआ।


