सरकारी जमीन व फंड से बना 125 करोड़ का कैंसर अस्पताल भी जाएगा टेंडर पर
टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निजी हाथों में होगा संचालन,
70 करोड़ केंद्र और 55 करोड़ राज्य सरकार ने लगाए
बिलासपुर। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार किया जा रहा करीब 125 करोड़ रुपए का कैंसर अस्पताल अब निजी हाथों में सौंपे जाने की तैयारी में है। अस्पताल के निर्माण में केंद्र सरकार की ओर से करीब 70 करोड़ रुपए तथा शेष 55 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने की जानकारी दी गई है। अस्पताल के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
अस्पताल में करीब 289 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। बताया गया है कि अस्पताल के लिए करोड़ों रुपए के उपकरण भी आने लगे हैं। ऐसे में सरकारी फंड से तैयार इस अस्पताल को निजी हाथों में सौंपे जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा पर भी सवाल
अस्पताल के निजी हाथों में संचालन जाने के बाद यहां मरीजों को मिलने वाली इलाज की सुविधाओं और शुल्क को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। खबर के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में जहां मरीजों को कई सुविधाएं नि:शुल्क या कम खर्च में मिलती हैं, वहीं निजी संचालन के बाद इलाज महंगा होने की आशंका जताई जा रही है।
कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी चुनौती
अस्पताल से जुड़े चिकित्सकीय ढांचे में कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों की जरूरत बताई गई है। कैंसर उपचार के साथ रेडिएशन और सर्जरी जैसी सेवाओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की नियुक्ति को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
टेंडर और एमओयू से होगा संचालन
रिपोर्ट के अनुसार कैंसर अस्पताल के संचालन के लिए टेंडर निकाला जा चुका है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल का संचालन निजी एजेंसी के हाथों में सौंपा जाएगा। अस्पताल के संचालन को लेकर एमओयू किए जाने की भी जानकारी दी गई है।
सवाल यह है कि सरकारी जमीन और सरकारी फंड से तैयार हुए इस अस्पताल का संचालन निजी हाथों में जाने के बाद आम मरीजों को किस दर पर और कितनी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर लोगों की नजर अब टेंडर की शर्तों और सरकार की आगे की व्यवस्था पर है।
