लीलागर नदी तट पर ऐतिहासिक ससहा मेला 22 फरवरी से, 11 मार्च तक रहेगा आयोजन
जांजगीर–चांपा जिले के सीमावर्ती ग्राम ससहा में स्थित लीलागर नदी के तट पर प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी पारंपरिक मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
मेले की शुरुआत सन् 1957 में भीषण अकाल (वर्षा की कमी) के समय हुई थी। उस कठिन दौर में क्षेत्र के मालगुजारों, जनप्रतिनिधियों, बुजुर्गों, व्यापारियों एवं ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया गया। यह यज्ञ लगातार 12 वर्षों तक फाल्गुन शुक्ल पंचमी से चैत्र कृष्ण पंचमी तक प्रतिवर्ष चलता रहा। बाद में यह आयोजन मेले के रूप में परिवर्तित हो गया, जो आज एक विशाल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप ले चुका है।
वर्तमान समय में मेला स्थल पर श्री विष्णु–लक्ष्मी मंदिर के साथ-साथ साहू समाज, केवट समाज, कंवर समाज, यादव समाज, पटेल समाज, सतनामी समाज सहित विभिन्न समुदायों द्वारा मंदिरों का निर्माण कराया गया है। इसी कारण यह स्थान अब केवल मेला स्थल ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र के रूप में भी पहचाना जाता है।
इस वर्ष मेले का आयोजन दिनांक 22 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक किया जाएगा। मेले में मनोरंजन और खरीदारी के लिए टॉकीज, झूला, सर्कस के साथ कपड़ा, बर्तन सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें लगेंगी। दूर-दराज के क्षेत्रों से व्यापारी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में मेले में पहुंचते हैं।
मेले की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि एवं ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। साफ-सफाई, व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर पंचायत द्वारा आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यह मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए हुए है।
