“अधिवक्ताओं की भलाई ही मेरा संकल्प… यह जीत मेरी नहीं, अधिवक्ताओं की विजय है” — भास्कर साहू, नवनिर्वाचित राज्य विधिक परिषद सदस्य
कसडोल से उठी एकता की गूंज, पूरे बलौदाबाजार में छाया उल्लास — अधिवक्ता समुदाय ने भव्य स्वागत कर व्यक्त किया विश्वास
गोलू कैवर्त्य बलौदाबाजार/कसडोल।
राज्य विधिक परिषद सदस्य (State Bar Council) चुनाव के नतीजों ने इस बार बलौदाबाजार जिले का राजनीतिक और अधिवक्ता समुदाय का परिदृश्य बदल दिया है। कसडोल जनपद के अंतर्गत ग्राम हसुवा निवासी, सरल स्वभाव और प्रखर कानूनी समझ रखने वाले अधिवक्ता भास्कर साहू ने भारी मतों से जीत हासिल कर अपने क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, कसडोल से लेकर बलौदाबाजार जिला मुख्यालय तक अधिवक्ताओं, समर्थकों और नागरिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। अधिवक्ता संघों के कार्यालय, कोर्ट परिसर, प्रमुख चौक-चौराहों पर “अधिवक्ता एकता जिंदाबाद”, “भास्कर साहू अमर रहें”, तथा “न्याय की आवाज को मिला मजबूत प्रतिनिधि” जैसे नारे गूंजने लगे।
पहली बार कसडोल व्यवहार न्यायालय पहुँचे साहू — अधिवक्ताओं ने फूल-मालाओं से किया भव्य स्वागत
जीत के उपरांत जब भास्कर साहू कसडोल व्यवहार न्यायालय पहुंचे तो वहां ऐसा नजारा था जैसे किसी बड़े त्यौहार का आयोजन हो। अधिवक्ताओं ने पग-पग पर फूल वर्षा कर, अभिनंदन कर और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। अदालत परिसर के हर कोने में उत्साह और उमंग की लहर दिखाई दे रही थी।
अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं सैकड़ों अधिवक्ताओं की मौजूदगी में स्वागत समारोह अत्यंत गरिमामय तरीके से सम्पन्न हुआ। उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि साहू की जीत अधिवक्ताओं के सम्मान, सुविधा और अधिकारों की जीत है।
न्यूज़ वेबसाइट ‘आवाज इंडिया’ से विशेष बातचीत — साहू ने बताई अपनी प्राथमिकताएँ
इस मौके पर गोलू कैवर्त्य, बलौदाबाजार ब्यूरो हेड, आवाज इंडिया न्यूज, ने भास्कर साहू से खास बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा—
“मैंने अपने जीवन में कभी कोई निजी स्वार्थ नहीं देखा। अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान, पेंशन और सुविधाएँ मेरी पहली प्राथमिकता हैं। यह जीत मेरी नहीं—हम सबकी है। मैं हमेशा अधिवक्ताओं की आवाज को निडरता से राज्य स्तर पर उठाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र की रीढ़ है और इस रीढ़ को मजबूत किए बिना न्याय प्रणाली मजबूत नहीं हो सकती।
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अधिवक्ताओं की बड़ी समस्याओं पर खुलकर बोले साहू
भास्कर साहू ने स्वीकार किया कि आज अधिवक्ता समुदाय कई व्यावहारिक समस्याओं से जूझ रहा है —
1. अधिवक्ताओं की सुरक्षा
कोर्ट परिसरों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है। कई जगह सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं।
2. पेंशन व्यवस्था
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पेंशन व्यवस्था पर तुरंत प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।
3. कोर्ट भवनों और लाइब्रेरी का आधुनिकीकरण
उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी, बेहतर फर्नीचर, बार रूम के लिए संसाधनों की मांग को अपनी प्राथमिकता बताया।
4. नवोदित अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन
नए अधिवक्ताओं के लिए ट्रेनिंग, वर्कशॉप और संसाधनों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की घोषणा की।
अभिभाषक संघ कसडोल के पदाधिकारी और सैकड़ों अधिवक्ता रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित प्रमुख चेहरे—
बलराम साहू (अध्यक्ष, अभिभाषक संघ)
देवचरण पटेल
मिनकेतन नायक
संतराम साहू
उदित निषाद
ओमप्रकाश खरे
तक़ीम मोहम्मद कुरैशी
अमित देवांगन
लहर सिंह पैकरा
प्रमोद पटेल
विनोद बंजारे
राकेश कैवर्त्य
किशोर साहू
कांशीराम कैवर्त्य
मोहन महेंद्र
सुशील साहू
रामकुमार कैवर्त्य
धनंजय अजगल्ले
सूर्यशंकर तिवारी
भारत कश्यप
सुभाष चंद्र दुबे
गायत्री कैवर्त्य
सुमन साहू
सहित अधिवक्ता समुदाय के अनेक वरिष्ठ और युवा चेहरे मौजूद रहे।
इन सभी ने कहा कि भास्कर साहू के आने से अधिवक्ताओं की आवाज मजबूत होगी तथा न्यायिक व्यवस्था के विकास को नई दिशा मिलेगी।
क्षेत्र में जश्न का माहौल, गांव और कस्बों में मिठाई वितरण
हसुवा, कसडोल, बलौदाबाजार सहित आसपास के गांवों में साहू की जीत पर जश्न की लहर है।
लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य किया, आतिशबाजी की और मिठाइयाँ बांटी। गाँव में शाम तक जश्न का सिलसिला चलता रहा।
कई वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि इस जीत से अधिवक्ताओं ही नहीं बल्कि आम जनता को भी न्याय व्यवस्था में नई उम्मीद मिली है।
“विश्वास की शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं” — साहू
स्वागत समारोह के समापन पर भास्कर साहू ने कहा
मुझे जिस तरह प्यार और सम्मान मिला है, मैं उम्रभर इसे चुका नहीं सकूंगा।
मेरा हर एक कदम अधिवक्ताओं के हित, उनकी सुरक्षा और उनके सम्मान को समर्पित रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ताओं को एकजुट रहकर अपनी समस्याओं और मांगों को उठाना चाहिए। वे हर मंच पर उनकी आवाज बनकर कार्य करेंगे।
निष्कर्ष : अधिवक्ता समुदाय को मिला मजबूत प्रतिनिधि
भास्कर साहू की जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि एक संदेश है
कि जब एकता होती है, तो बदलाव निश्चित होता है।
उनकी सरलता, न्यायप्रियता और अधिवक्ताओं के लिए किए गए सतत संघर्ष ने उन्हें यह सम्मान दिलाया है।
आने वाले समय में क्षेत्र के अधिवक्ता समुदाय की अपेक्षाएँ उनसे बहुत ज्यादा होंगी, और साहू ने स्पष्ट कर दिया है कि वे हर चुनौती के लिए तैयार हैं।
