चंगोरी में कोटवारी जमीन पर रेत माफिया का राज!प्रशासन की नाक के नीचे महीनों से चल रहा अवैध कारोबार, अब खुली पोल
रूपेश जोशी बलौदा बाजार।जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के तहसील लवन से करीब 17 किलोमीटर दूर त्रिवेणी नदी के संगम किनारे बसा कैवर्त्य समाज की बहुलता वाली गॉव ग्राम पंचायत चंगोरी है जो इन दिनों रेत से जुड़े मामलों के चलते पूरे बलौदाबाजार जिला में सुर्खियां बटोर रही है
आपको आगे बताते चलें कि यहां रेत का अवैध भण्डारण एक सरकारी कोटवारी सेवा के लिए आवंटित भूमि पर लंबे समय से चल रहा रेत का अवैध भंडारण अब एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। मीडिया सूत्र एवं नाम नहीं छापने की शर्त पर चंगोरी ग्राम पंचायत के कुछ ग्रामीणों ने मीडिया को मोबाईल से बताया कि कोटवारी जमीन का संरक्षक फौजदारी चौहान, जो वर्तमान सरपंच बसंती चौहान का पति भी है, पर आरोप है कि उसने सरकारी जमीन को खुलेआम रेत माफियाओं के हवाले कर रेत के अड्डे में बदल दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, महीनों से यहां ट्रैक्टर-ट्रॉली और हाइवा के जरिए रेत का संग्रहण व सप्लाई का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल तहसीलदार, राजस्व अमला और खनिज विभाग की आंखों के सामने होता रहा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य।
कोटवारी जमीन पर रेत भंडारण की अनुमति संभव ही नहीं
जानकारों के अनुसार, कोटवारी भूमि सरकार की राजस्व सहायता व प्रशासनिक सेवा के लिए होती है। इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधि—खासतौर पर खनिज भंडारण—के लिए न तो संभव है और न ही कानूनी।
फिर भी चंगोरी में ये धंधा पूरे इलाके को चैलेंज करते हुए चल रहा था।
तहसीलदार के अधीन कोटवार का ‘दुस्साहस’ अनुशासन के प्रति घोर लापरवाही का प्रमाण है जिस पर कोटवार के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
मामला यह भी गंभीर बनाता है कि कोटवार—जो खुद राजस्व विभाग की जमीनी सेवा का हिस्सा होता है—वही सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने में सबसे आगे दिख रहा है। और राजश्व चुना लगाने में रेत माफिया से साठगांठ करके इस खेल का हिस्सा है ,शासन प्रशासन को धोखे में रखकर इस तरह का अवैध कारोबार सबकी नींद उड़ा दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोटवारों को सरकार जमीन खेती बाड़ी के लिए जीवन गुजर बसर के लिए दिया जाता है लेकिन उस जमीन पर रेत का बड़े पैमाने पर गोरख धंधा घोर कलयुग आ गया है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे बड़े सवाल
महीनों तक चली गतिविधि के बावजूद:
तहसीलदार ने कोई निरीक्षण नहीं किया,जिससे ग्रामीणों के बीच यह चर्चा गर्म है कि कहीं न कहीं प्रशासन के भीतर भी ‘मौन सहमति’ का खेल जरूर चल रहा है।
संवेदनशील जिला खनिज अधिकारी अवधेश बारीक का कहना है कि
“कोटवारी जमीन पर रेत का अवैध भंडारण पहली बार आपके माध्यम से जानकारी मिल रही है। जांच टीम भेजकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।”
उनका यह बताता है कि कोटवारी भूमि पर बेचने के लिए रेत की भण्डारण की स्वीकृति सम्भव नहीं है फिर भी रेत माफिया दादागिरी पूर्वक महीने भर से ज्यादा समय तक रेत की अवैध भंडारण परिवहन करवाकर प्रशासन को लाखों करोड़ों रुपए की चुना लगाते आया है जिस पर जांच टीम गठित किये जाने की मांग जोर पकड़ रहा है ,। महीनों तक ट्रकों की आवाजाही, भारी सड़क-धूल और माफियाओं की गतिविधि के बीच अधिकारियों को खबर ही नहीं हुई?
‘बेरोकटोक महीनों से जारी खेल’—क्या था संरक्षण?
ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफियाओं को स्थानीय स्तर पर
सहित
✓ कोटवार,
✓ सरपंच परिवार,
✓ और कुछ प्रभावशाली लोगों
का आशीर्वाद मिला हुआ था, जिसके चलते रेत का अवैध स्टॉक दिन-रात चलता रहा।
घटनास्थल के हालात
बड़ी-बड़ी रेत की ढेरियां
ट्रैक्टरों की आवाजाही
मशीनों के निशान
गांव के भीतर बढ़ते धूल एवं वायु का प्रदूषण गॉव वालों का जीना मुश्किल कर दिया है ,लवन से चंगोरी तक पक्की सड़क का हाल बेहाल हैं।सड़क निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की सौगात देते रहा है लेकिन पलभर में रेत माफिया उन सड़कों की बैंड बजाने में तुले रहते हैं ऐसे लोगों पर विभागीय कार्रवाई के साथ साथ कानूनी कार्यवाही भी सुनिश्चित होनी चाहिए ,
रात में रेत लाने-ले जाने का सिलसिला
गाँव वालों के अनुसार, इस अवैध कारोबार ने गांव के माहौल तक को रेत व्यापार का केंद्र बना दिया है।
अब क्या होगी कार्रवाई?
खनिज विभाग ने जांच टीम भेजने की बात कही है। लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि:
अवैध भंडारित रेत की जप्ती हो,इसके साथ ही अभी तक जितने भी ट्रैक्टर ,हाइवा रेत का अवैध परिवहन हुआ है उसका राजश्व शुल्क दोषियों से वसूली की नियमतः कार्रवाई भी होनी चाहिए ताकि शासन प्रशासन को ठेंगा दिखाने वाले लोगों के लिए एक सबक बने।नहीं तो आने वाले समय में लोग बिना परवाह किए ऐसे ही गोरख धन्धो को अंजाम देते रहेंगे।
कोटवार व सरपंच प्रतिनिधि पर व ठेकेदार पर अपराध दर्ज की कार्रवाई भी होनी चाहिए कठोर कार्रवाई हो,
संबंधित राजस्व अधिकारियों की को कैसे भनक नहीं लगी यह भी हैरान कर देने वाली बात है
और प्रशासनिक लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाए।
ग्रामीणों की आवाज
“सरकारी जमीन को निजी जेब भरने में बदल दिया गया है। गांव की जमीन है, गांव का हक है, इसे रेत माफिया कैसे हड़प सकते हैं?”
—एक ग्रामीण का बयान
निष्कर्ष
चंगोरी में कोटवारी जमीन पर रेत का अवैध भंडारण सिर्फ एक छोटा मामला नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मिलीभगत, भ्रष्टाचार और रेत माफिया के बढ़ते हौसले का आईना है। अब यह देखना होगा कि जांच टीम आने के बाद कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या वाकई इस गोरखधंधे पर लगाम कस पाती है या नहीं।ग्राम पंचायत चंगोरी के वर्तमान सचिव लक्ष्मी नारायण पटेल ने मीडिया के सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि उनके जानकारी में बाद में आया है मैंने संबंधित विभाग को मामले की शिकायत करने की विचार लाया था लेकिन बिजी शेड्यूल में शिकायत नहीं कर पाया ,वह जगह कोटवारी है जंहा रेत का भंडारण हुआ है। लवन तहसीलदार पेनका टोन्डरे ने पत्रकारों को बताया कि आपके माध्यम से जानकारी मिली है कल दिखवाता हूँ जो भी दोषी होगा सख्त कार्रवाई होगी।
