जनसुनवाई प्रक्रिया पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की निरस्त करने की मांग
पचपेड़ी/मस्तूरी। प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना की जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रभावित गांवों के लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान जनसुनवाई प्रक्रिया को तत्काल निरस्त कर नए सिरे से व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ नई तारीख घोषित की जाए। उनका कहना है कि पहले क्षेत्र में मौजूदा प्रदूषण की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि कंपनी द्वारा पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में प्रभावित क्षेत्रों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराना और प्रदूषण से प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा देना भी शामिल है।
नियम क्या कहते हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना 2006 के तहत जनसुनवाई की सूचना कम से कम 30 दिन पहले प्रमुख समाचार पत्रों, ग्राम पंचायतों और संबंधित वेबसाइटों पर प्रकाशित करना अनिवार्य है। साथ ही परियोजना से प्रभावित 5 किलोमीटर के दायरे के सभी गांवों में मुनादी कराकर जानकारी देना भी आवश्यक है। आरोप है कि इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना पर्याप्त सूचना और पारदर्शिता के जनसुनवाई आयोजित की गई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। साथ ही परियोजना स्थल के सामने चक्काजाम और व्यापक आंदोलन करने की भी चेतावनी दी गई है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और संगठनों ने भी ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि जनता की सहमति और पर्यावरणीय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

