छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर आवाज़ हुई खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन

 छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर आवाज़ हुई खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का रविवार, 5 जुलाई की सुबह लगभग 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका उपचार एम्स रायपुर में चल रहा था।

बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फोन पर उनके परिजनों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। लेकिन रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपनी अनूठी गायन शैली, दमदार आवाज़, अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति से पंडवानी लोकगाथा को देश-विदेश तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत कर उन्होंने लाखों लोगों का दिल जीता और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

अपने लंबे कलात्मक जीवन में तीजन बाई ने देश और विदेश में हजारों प्रस्तुतियां दीं। लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।

तीजन बाई का जाना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज़ और कला आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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